9 February 2021 : करंट अफेयर्स (Current Affairs 2021)

2020-21 में 360 लाख गांठ रहेगा कपास उत्पादन: सीएआई

  • भारतीय कपास संघ (Cotton Association of India-CAI) ने 2020-21 सत्र में कपास उत्पादन के अनुमान को 360 लाख गांठ पर बनाए रखा है।
  • इससे पहले, सीएआई ने जनवरी में भी इतना ही अनुमान जताया था।
  • सीएआई ने कहा कि अक्टूबर 2020 से जनवरी 2021 के दौरान कुल कपास की आपूर्ति 386.25 लाख गांठ होने का अनुमान है।
  • एक गांठ 170 किलोग्राम की होती है।
  • इसमें 255.25 लाख गांठों की नई आवक, 31 जनवरी तक छह लाख गांठों का अनुमानित आयात और एक अक्टूबर, 2020 के पहले का बचा 125 लाख गांठ का स्टॉक शामिल है।
  • सीएआई ने अक्टूबर 2020 से जनवरी 2021 तक 110 लाख गांठों पर कपास की खपत का अनुमान लगाया है। इसी दौरान निर्यात 29 लाख गांठ होने का अनुमान है।
  • कपास का कुल स्टॉक 31 जनवरी को 247.25 लाख गांठ रहने का अनुमान है।
  • कपास की कुल घरेलू खपत इस विपणन वर्ष में 330 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले महीने के अनुमान के अनुरूप है। यह खपत में 80 लाख गांठ की वृद्धि दर्शाता है।
  • कोविड19 के कारण लॉकडाउन से प्रभावित पिछले फसल वर्ष में 250 लाख गांठ की खपत होने का अनुमान है।
  • सीएआई ने पिछले कपास सत्र में अनुमानित 50 लाख गांठों के मुकाबले चालू सत्र में निर्यात 54 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है।

लद्दाख में भारत की पहली भूतापीय ऊर्जा परियोजना शुरू करेगी ओएनजीसी

  • एनर्जी प्रमुख ओएनजीसी (Oil and Natural Gas Corporation-ONGC) लद्दाख (Ladakh) में भारत की पहली भू-तापीय क्षेत्र विकास परियोजना (Geothermal Field Development Project) शुरू करेगी।
  • योजना को औपचारिक रूप देने के लिए ओएनजीसी एनर्जी सेंटर (ओईसी) और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख एवं लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • ओएनजीसी की इस परियोजना से भारत भू-तापीय बिजली के मामले में वैश्विक मानचित्र पर आ जाएगा।
  • ओएनजीसी (Oil and Natural Gas Corporation-ONGC) ने तीन चरणों में इसके विकास की योजना बनाई है। पहले चरण में 500 मीटर की गहराई तक कुओं की खुदाई की जाएगी। यह खोज-सह-उत्पादन अभियान होगा।
  • इसमें पायलट आधार पर एक मेगावाट तक की क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
  • दूसरे चरण में भू-तापीय क्षेत्र के लिए और गहराई में खोज की जाएगी। इसके तहत अनुकूलतम संख्या में कुओं की खुदाई की जाएगी और उच्च क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
  • तीसरे चरण में भू-तपीय संयंत्र का वाणिज्यिक विकास किया जाएगा। इस समय पूर्वी लद्दाख में पुगा और चुमाथांग भारत में सबसे अधिक आशाजनक भूतापीय क्षेत्र हैं।

संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के लिए DRDO और IISC के बीच एमओयू

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation-DRDO) मौजूदा संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के दायरे और उद्देश्य का विस्तार करने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science-IISc) के परिसर में जेएटीपी-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (जेएटीपी- सीओई) का निर्माण करेगा।
  • इस संबंध में DRDO और भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science-IISc) बेंगलुरु (Bengaluru) ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है।
  • संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी कार्यक्रम-उत्कृष्टता केंद्र (जेएटीपी-सीओई) निर्देशित बेसिक एंड एप्लाइड रिसर्च को सक्षम बनाएगा।
  • साथ ही बहु-अनुशासनात्मक और बहु-संस्थागत सहयोग के माध्यम से प्रमुख अनुसंधानसंस्थानों के साथ जुड़ सकेगा।
  • केंद्र में केंद्रित अनुसंधान प्रयासों से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की प्राप्ति होगी।

वैज्ञानिकों को पूर्वी हिमालय क्षेत्र में भूकंप के भूगर्भीय साक्ष्य मिले

  • वैज्ञानिकों को असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित हिमबस्ती गांव में भूकंप का पहला भूगर्भीय साक्ष्य (Geological Evidence of Earthquake) मिला है।
  • इतिहासकारों ने इसे इस क्षेत्र में बड़े विनाश का कारण बने सदिया भूकंप (Sadiya Earthquake) के रुप में दर्ज किया है।
  • ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 1667 ईस्वी में आए इस भूकंप ने सदिया शहर को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया था।
  • यह खोज पूर्वी हिमालय क्षेत्र में भूंकप की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उसके अनुरुप यहां निर्माण गतिविधियों की योजना बनाने में मददगार हो सकती है।
  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology-DST) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology-WIHG) के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के हिमबस्ती गांव के उस क्षेत्र में उत्खनन किया जहां 1697 में सादिया भूकंप आने के ऐतिहासिक साक्ष्य मिले हैं।
  • उत्खनन में प्राप्त इन साक्ष्यों का आधुनिक भूवैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से विश्लेषण किया गया।
  • अध्ययन में पाया कि इस क्षेत्र में जमीन के नीचे चट्टानें खिसकने से आए भूकंप के निशान नदियों और झरनों के पास सतह के उपर जमा भूगर्भीय पदार्थों के रूप में मौजूद हैं।
  • इस बारे में और गहन अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यहां उत्खनन स्थल से इक्कीस रेडियोकार्बन नमूने इकठ्ठा किए।
  • सुबनसिरी नदी (Subansiri River) के डेल्टा क्षेत्र में गादर वाले स्थान पर बड़े बड़े वृक्षों की टहनियां (सदिया सुबनसिरी नदी के दक्षिण-पूर्व में लगभग 145 किमी दूर स्थित है) गाद में दबी पाईं जो यह बताता है कि भूकंप के बाद भी छह महीने तक आते रहे इसके हल्के झटकों की वजह से नदी में इतनी मिट्टी और मलबा जमा हो गया था कि उसकी सतह उपर उठ गई।
  • यह शोध हाल ही में ‘साइंटिफिक रिपोर्ट’ (Scientific Reports) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

आकाशवाणी संगीत समारोह का नाम भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के नाम पर रखा जाएगा

  • सूचना प्रसारण मंत्री (Information and Broadcasting Minister) प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने आकाशवाणी संगीत समारोह का नाम भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी (Pandit Bhimsen Joshi) के नाम पर रखे जाने की घोषणा की है।
  • पुणे में पंडित भीमसेन जोशी शताब्दी स्मारक कार्यक्रम में यह घोषणा की गई है।
  • पंडित भीमसेन जोशी को 2009 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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