5 September 2020 : करंट अफेयर्स (Current Affairs 2020)

काशी : ज्ञानवापी मस्जिद से सटे क्षेत्र में मंदिर के अवशेष मिले

  • श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Dham Corridor) की खुदाई के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद से सटे क्षेत्र में मंदिर के अवशेष मिले हैं।
  • काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौरांग राठी के अनुसार, बीएचयू के पुराइतिहास विभाग और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को इसकी जानकारी दी गई है।
  • क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने कहा कि करीब पांच फुट का पत्थर पुराने मंदिर या मठ के दरवाजे का हिस्सा है।
  • निर्माण शैली के आधार पर इसे पंद्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी का माना जा सकता है।
  • पत्थर पर कमल दल और कलश की आकृतियां हैं।
  • कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया में चंद्रगुप्त काल से लेकर उससे भी प्राचीन मंदिर सामने आ चुके हैं।
  • भवनों को ढहाने के दौरान मणिकर्णिका घाट किनारे दक्षिण भारतीय शैली में रथ पर बना अद्भुत शिव मंदिर सामने आया था, जिसमें समुद्र मंथन से लेकर कई पौराणिक गाथाएं उकेरी गई हैं।
  • श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से हूबहू मिलता एक और मंदिर मिला था। इन मंदिरों को संरक्षित करने काम चल रहा है।
  • काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करीब 250 साल बाद होने जा रहा है।
  • 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने यह मंदिर बनवाया था।
  • 345 करोड़ की लागत से बनने वाले काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लिए भवन व जमीन खरीद पर 400 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
  • कॉरिडोर में कुल 24 भवन बनने हैं। इनमें से 15 का कार्य शुरू हो गया है।
  • पांच लाख वर्ग फुट के कॉरिडोर में सिर्फ 30 फीसदी क्षेत्र में निर्माण होगा।

असम धरोहर विधेयक पारित

  • असम विधानसभा ने राज्य की ऐसी मूर्त विरासत की रक्षा, संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए एक विधेयक पारित किया है, जो कि वर्तमान में किसी भी राष्ट्रीय या राज्य कानून के तहत शामिल नहीं है।
  • इस विधेयक के पारित होने के बाद, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने 1985 के असम समझौते के खंड 6 को लागू करने की दिशा में इसे एक ‘ऐतिहासिक’ कदम बताया है।
  • इस विधेयक में संग्रहालय वस्तुओं (Museum Objects) जैसे सिक्के, मूर्तियों, पांडुलिपियों, पुरालेखों या कला और शिल्प कौशल के अन्य कार्य और स्वदेशी लोगों की सभी सांस्कृतिक कलाकृतियों को शामिल किया गया है।
  • यह विधेयक असम की मूर्त विरासत की रक्षा, संरक्षण, रखरखाव और जीर्णोद्धार का प्रयास करता है।
  • अधिनियम में उन सभी धरोहरों को शामिल किया जाएगा जो कम-से-कम 75 वर्ष से अस्तित्‍व में हैं।
  • इस विधेयक के तहत उन धरोहर स्थलों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिन्हें संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्‍व के रूप में घोषित किया गया है अथवा जिन्हें असम प्राचीन स्मारक और अभिलेख अधिनियम, 1959 के तहत कवर किया गया है।
  • असम समझौते की धारा-6 में असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान और धरोहर के संरक्षण तथा उसे बढ़ावा देने के लिए उचित संवैधानिक, विधायी तथा प्रशासनिक उपाय करने का प्रावधान है।

प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के तहत स्टार्टअप को मिल सकेगा 50 करोड़ तक का लोन

  • स्टार्टअप और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मदद के लिए रिजर्व बैंक ने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) के नियमों में संशोधन किया है।
  • अब बैंक पीएसएल के तहत स्टार्टअप कंपनियों को 50 करोड़ रुपए तक कर्ज मुहैया करा सकेंगे।
  • हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर, जिसमें सरकार की आयुष्मान भारत स्कीम के तहत कार्यरत इकाइयां शामिल हैं के लिए कर्ज की सीमा दोगुनी कर दी गई है।
  • अब बैंक इन्हें 10 करोड़ रुपए तक कर्ज मुहैया करा सकेंगे।
  • इन्हें दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में हेल्थकेयर सुविधाएं खड़ी करने के लिए यह कर्ज मिल सकेगा।
  • रिजर्व बैंक के संशोधित दिशानिर्देश के मुताबिक, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर यानी अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए कर्ज की सीमा में दोगुनी बढ़ोतरी कर इसे 30 करोड़ रुपए किया गया है।
  • सोलर आधारित पावर जनरेटर, बायोमास आधारित पावर जनरेटर, विंड मिल और माइक्रो-हाईडिल प्लांट्स को पीएसएल का दर्जा मिलेगा।
  • स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम और रिमोट विलेज इलेक्ट्रिफिकेशन जैसी गैर-पारंपरिक ऊर्जा आधारित पब्लिक यूटिलिटी भी पीएसएल का दर्जा पाने की पात्र होंगी।
  • इंडिविजुअल हाउसहोल्ड में प्रति व्यक्ति कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए रुपए होगी।

बांग्लादेश (दाउदकंडी) को त्रिपुरा (सोनमुरा) से जोड़ने वाली गुमटी नदी मार्ग पर ट्रायल रन शुरू हुआ

  • त्रिपुरा और बांग्लादेश को अंतर-देशीय जलमार्ग से जोड़ने के लिए बांग्लादेश के दाउदकंडी से त्रिपुरा के सोनमुरा तक ट्रायल रन की शुरुआत हो गई है।
  • इस ट्रायल के हिस्से के रूप में बांग्लादेश के दाउदकंडी से एक जहाज़ त्रिपुरा के सोनमुरा के लिये रवाना हुआ है, जो कि 93 किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए अनुमानतः 5 सितंबर तक भारत पहुंचेगा।
  • इस जलमार्ग के शुरू होने से पूर्वोत्तर के राज्यों को खासा फायदा मिलेगा और भारत तथा बांग्लादेश के बीच कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।
  • मौजूदा कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के दौर में अंतर-देशीय जलमार्ग के माध्यम से उन्नत कनेक्टिविटी दोनों देशों (भारत-बांग्लादेश) के व्यापारियों और व्यापारिक समुदायों के लिये परिवहन का एक किफायती, तेज़, सुरक्षित और स्वच्छ माध्यम प्रदान करेगी।

जम्मू-कश्मीर जैव विविधता परिषद का गठन

  • जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में जैविक घटकों के संरक्षण और उसके घटकों के सतत् उपयोग के लिए 10 सदस्यीय परिषद का गठन किया।
  • यह जैव विविधता परिषद राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के परामर्श से कार्य करेगी।
  • राज्य के प्रधान महा वनसंरक्षक (Principal Chief Conservator of Forests) इस 10 सदस्यीय पैनल के अध्यक्ष होंगे, साथ ही इस पैनल में पांच गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल होंगे।
  • वहीं जम्मू-कश्मीर के वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक इस परिषद के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
  • परिषद के गैर-सरकारी सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष की अवधि का होगा।
  • प्रदेश के वित्त विभाग की सहमति से यह एक कोष का गठन करेगी, जिसे ‘जम्मू और कश्मीर जैव विविधता परिषद कोष’ (Jammu and Kashmir Biodiversity Council Fund) के रूप में जाना जाएगा और इसमें सभी शुल्क, प्रभार और परिषद द्वारा प्राप्त लाभ राशि डाली जाएगी।
  • यह परिषद राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के परामर्श से, जैव विविधता से संबंधित मुद्दों में अनुमोदन प्राप्त करने के लिए प्रारूप और प्रक्रियाओं को सूचित करेगा।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) में 3,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि शामिल करने को मंज़ूरी

  • असम सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) में 3,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि शामिल करने को मंज़ूरी दी है।
  • अतिरिक्त भूमि शामिल होने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 914 वर्ग किमी हो जाएगा।
  • इससे पूर्व राष्ट्रीय उद्यान में 2016 में 195 वर्ग किमी. भूमि शामिल की गई थी, जिससे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को ओरंग राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ा गया था।
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है।
  • उद्यान में लगभग 250 से अधिक मौसमी जल निकाय (Water Bodies) हैं, इसके अलावा डिपहोलू नदी (Dipholu River) इसके मध्य से बहती है।
  • काजीरंगा में संरक्षण प्रयासों का अधिकांश ध्यान ‘बड़ी चार’ प्रजातियों- राइनो (Rhino), हाथी (Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) और एशियाई जल भैंस (Asiatic Water Buffalo) पर केंद्रित है।
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान विश्व में लुप्तप्राय एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा निवास स्थान है।
  • उद्यान में लगभग 2,400 गैंडे और 121 बाघ हैं।

दश्त-ए लुट (Dasht-e Lut) से मीठे पानी के क्रस्टेशिया (Crustacea) की एक नई प्रजाति की खोज

  • पृथ्वी पर सबसे गर्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध मरुस्थल दश्त-ए लुट (Dasht-e Lut) से मीठे पानी के क्रस्टेशिया (Crustacea) की एक नई प्रजाति की खोज की गई है।
  • क्रस्टेशिया की यह नई ज्ञात प्रजाति जीनस फालोक्रिप्टस (Phallocryptus) से संबंधित है।
  • अलग-अलग शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में क्रस्टेशिया (Crustacea) की पहले से ही चार प्रजातियां ज्ञात हैं।
  • ईरानी संरक्षण जीवविज्ञानी ‘हादी फहीमी’ (Hadi Fahimi) के सम्मान में क्रस्टेशिया (Crustacea) की इस नई प्रजाति को फालोक्रिप्टिस फहीमी (Phallocryptus Fahimii) नाम दिया गया है।
  • जीवविज्ञानी ‘हादी फहीमी’ (Hadi Fahimi) की 2018 में एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
  • Hadi Fahimi 2017 में उस अभियान दल का हिस्सा थे जो ईरान के दश्त-ए लुट मरुस्थल की पारिस्थितिकी, जैव विविधता, भू-आकृति विज्ञान एवं जीवाश्म विज्ञान को बेहतर ढंग से समझने के लिए इसका अन्वेषण कर रहा था।
  • क्रस्टेशिया (Crustacea) की इस नई प्रजाति से संबंधित निष्कर्षों को ‘ज़ूलॉजी इन मिडिल ईस्ट’ (Zoology in the Middle East) में प्रकाशित किया गया है।
दश्त-ए लुट (Dasht-e-Lut)
  • दश्त-ए लुट (Dasht-e-Lut) एक विशाल लवणीय रेगिस्तान है जो ईरान के केरमान (Kerman) एवं सिस्तान (Sistan) तथा बलूचिस्तान (Baluchestan) प्रांतों में फैला हुआ है।
  • यह दुनिया का 25वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है और ईरान का दूसरा सबसे बड़ा रेगिस्तान है।
  • दश्त-ए-काविर (Dasht-e-Kavir) जिसे काविर-ए-नमक एवं ग्रेट साल्ट डेज़र्ट (Great Salt Desert) के रूप में भी जाना जाता है, ईरान का सबसे बड़ा मरुस्थल है।
  • इसे 17 जुलाई 2016 को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
  • 2006 में नासा (NASA) ने इस रेगिस्तान का तापमान 70.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया था जो हाल के दिनों में बढ़कर 80.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
  • गहरे कंकड़ (Dark Pebbles) जो गर्मी उत्पन्न करते हैं, इस अधिकतम तापमान के कारणों में से एक हैं।
  • यहां औसत तापमान -2.6°C (सर्दियों में) से लेकर 50.4°C (गर्मियों में) तक होता है जबकि वार्षिक वर्षा 30 मिमी. प्रति वर्ष से अधिक नहीं होती है।

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